सत्ता की नीति !!! जय महाराष्ट्र

सत्ता की नीति ये कैसी है नीति सत्ता से जिसे प्रीति
सदियों से राज कर रही कहलाये राजनीति
मौकापरस्तों से शान है अंतर बैठा शैतान है
फितरत से ही बईमान है जाती धर्म हथियार हैं
भूख गरीबी उपहार हैं कमज़ोरियाँ हमारी मुद्दे है ये बनाती
कुर्सी है अपनी मंज़िल ये पाठ है पढ़ाती ।

चुनावी अखाड़ों में पहलवान ये उतारे
जो साम,दाम, दंड हर दांव फेंक मारे
जीते जो राजनीति सपने हमें दिखाए
हारे जो राजनीति ,ऐसे ये छटपटाय ,
जैसे कोई भूखा रोटी को है ललचाय
रेत से वादों के, ये घर सदा बनाय
सत्ता की लहरों में एक पल जो ठीक न पाएं

हम सब इसके शिकार हैं
अंधे और लाचार हैं
सदियों से इसके,जाल में फंसते ही ,
जा रहे हैं हर पांच साल में
सत्ता थमा रहे है

जय महाराष्ट्र

Author : Dolli can be reached out on her twitter handle @desh_bhkt